गठिया को जड़ से ख़त्म करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार #Introduction ,stages ,causes ,symptoms, precautions, AYURVEDIC TREATMENTS OF GOUT (ARTHRITIS )
परिचय
जोड़ हड्डियों से बने होते हैं जो एक कैप्सूल यानि संपुट में होते हैं। इस कैप्सूल के ऊतक (Tissue) एक प्रकार का चिकना द्रव्य बनाते हैं जिसे सायनोवियल फ्लूड (Synovial Fluid) कहा जाता है।
इसी फ्लूड की सहायता से उंगलियों के जोड़ आसानी से काम करते हैं। इसी द्रव्य पर कैप्सूल के अंदर के ऊतक भी निर्भर करते हैं। गठिया (Gathiya) की समस्या उस समय पैदा होती है जब शरीर बहुत ज्यादा यूरिक एसिड बनाने लगता है और उसके कण कैप्सूल के अंदर पहुंचने लगते हैं।
कैसे फैलता है गठिया (Stages of Gout)
गठिया (Gathiya) की शुरूआत सबसे पहले पंजों से होती है। अधिकांश रोगियों (लगभग 50%) में पैर के अंगूठे के जोड़ (मेटाटारसल-फेलेंजियल जोड़) में तकलीफ होती है। तब इसे पोडोग्रा (Podagra) भी कहते हैं। कुछ समय के बाद इसके कण शरीर के दूसरे जोड़ों तक फैल जाते हैं और यही दर्द बढ़ता हुआ कोहनी, घुटनें, हाथों की उगुंलियों के जोड़ों और ऊतकों तक पहुँचता है।
गठिया के लक्षण (Symptoms of Gout)
जोड़ों में रात को अचानक बहुत तेज दर्द होता है और सूजन आ जाती है। जोड़ लाल और गर्म महसूस होता है। साथ में बुखार और थकावट भी हो सकती है। गठिया का दौरा अमूमन 5-7 दिनों में ठीक हो जाता है। गठिया 75 प्रतिशत वंशानुगत होता है और यह ज्यादातर पुरूषों में पाया जाता है।
गठिया रोग के लक्षण (Risk Factors of Gout)
गठिया के रोगियों को रक्तचाप, डायबिटीज, मेटाबोलिक सिन्ड्रोम, वृक्क रोग और हृदय रोग का खतरा अधिक रहता है। यदि उपचार नहीं किया जाये तो यह धीरे-धीरे दीर्घकालीन और स्थाई रोग बन जाता है।
जोड़ों की सतह क्षतिग्रस्त होने लगती है। अक्षमता और अपंगता बढ़ जाती है। साथ ही शरीर में कई जगह (जैसे कान, कोहनी आदि) यूरिक एसिड जमा होने से दर्दहीन गांठें (Tophi) बन जाती हैं। यदि गुर्दे में पथरी बन जाये तो स्थिति और जटिल हो जाती है। ऐसे में किडनी खराब (Kidney Failure) होने का खतरा बढ़ जाता है।
कारण :
जीवनशैली (Causes of Gout)
• 12% रोगियों में गठिया (Gathiya) का मुख्य कारण आहार को माना गया है। शराब , फ्रुक्टोज-युक्त पेय, मांस, मछली के सेवन से गठिया का जोखिम बढ़ता है।
• चयापचय में आई खराबी
• मोटापा
कई रोग भी ऐसे होते हैं जिनकी वजह से गठिया रोग हो जाता है। यह रोग निम्न हैं:
• गुर्दे की बीमारी
• मेटाबोलिक सिंड्रोम
• पॉलीसायथीमिया
• लेड पॉयजनिंग
• वृक्कवात
• हीमोलिटिक एनीमिया
• सोरायसिस और अंग प्रतिस्थापन (Organ Replacement)
• मूत्रवर्धक दवाइयां (हाइड्रोक्लोरथायडाइड) का सेवन करने से भी गठिया हो सकता है।
• नायसिन, एस्पिरिन, साइक्लोस्पोरिन और टेक्रोलिमस आदि दवाइयां भी गठिया रोग का कारण बन सकती हैं।
लक्षण :
• कभी-कभी पैरों, सिर, टखने, घुटनों, जांघ और जोड़ों में दर्द के साथ-साथ सूजन आना
• कभी-कभी बुखार की शिकायत
• किसी अंग का शून्य हो जाना
• खाया भोजन न पचना
• जोड़ों को छूने तथा हिलाने में असहनीय दर्द होना
• शरीर में खून की कमी होजाना आदि गठिया के मुख्य लक्षण हैं
• शरीर में भारीपन
आयुर्वेदिक उपचार :
उम्र बढ़ने पर अक्सर लोगों को गठिया की शिकायत होने लगती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बॉडी में यूरिक एसिड की अधिकता होना होता है। जब बॉडी में यूरिक एसिड ज्यादा हो जाता है तो वह शरीर के जोड़ों में छोटे- छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है इसी कारण जोड़ों में दर्द और ऐंठन होती है। गठिया को कई स्थानों पर आमवत भी कहा जाता है।
बचाव :
• बार-बार पड़ने वाले दौरों (Attack) को रोकने के लिए डॉक्टर की सलाह से यूरिक एसिड कम करने की दवाइयां ले सकते हैं।
• साथ में दर्द और सूजन कम करने के लिए नॉन-स्टीरॉयडल एंटीइन्फ्लेमेट्री दवाइयां (NSAIDs), कोलचिसीन और स्टिरॉयड्स भी ले सकते हैं। यह दवाइयां प्रायः 1-2 हफ्ते तक दिये जाते हैं।
• गठिया के रोगियों को प्रोटीनयुक्त आहार से परहेज करना चाहिए। शरीर में प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए चोकरयुक्त आटे की रोटी तथा छिलके वाली मूंग की दाल खाएं।
• उबले अनाज, चावल, बाजरा, जौ, गेहूं, चपाती आदि भोजन में सम्मिलित करें।
• उबली हुई हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, साबूदाना, गिरीदार फल, शहद तथा सभी प्रकार के फल (खट्टे फल एवं केले को छोड़कर) पर्याप्त मात्रा में लें।
• नियमित टहलें, व्यायाम (क्षमतानुसार) एवं मालिश करें। कब्ज न होने दें। हफ्ते में एक दिन उपवास रखना चाहिए। इससे दर्द में राहत मिलती है।
गठिया के घरेलू उपाय
जब रोगी के शरीर के जोड़ों में गांठें बन जाती हैं, तो यही रोग गठिया है। गठिया में जोड़ों में बहुत दर्द तथा चुभन रहता है। गठिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज को असहनीय दर्द होता है। गठिया का दर्द इतना ज्यादा परेशान करता है कि व्यक्ति कोई भी काम करने में असमर्थ हो जाता है। गठिया का रोग होने पर शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। शरीर की हड्डियां कमजोर होने पर जोड़ों में दर्द, हाथ-पैर में सूजन और उठने-बैठने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है। पैरों में लगातार दर्द के कारण आर्थराइटिस की भी समस्या हो सकती है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि गठिया के दर्द को हल्के में न लिया जाए और इसके लिए पूरी एहतियात बरती जाए।
गठिया के दर्द से छुटकारा पाने के लिए घरेलू तरीके-
ज्यादा से ज्यादा पानी पीना- गठिया से पीडि़त होने पर ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। शुरूआत में बार बार पेशाब जाने पर आपको दिक्कत हो सकती है लेकिन कुछ दिनों में आराम मिल जाएगा।
रोजमेरी- ज्यादातर आयुर्वेदिक दवाइयों में रोजमेरी का प्रयोग किया जाता है। रोजमेरी की मदद से आप गठिया के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। यह गठिया के इलाज के लिए कारगर है। घर पर ही इसके इस्तेमाल के लिए एक कप पानी में थोड़ रोजमेरी के पत्ते डालें और इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इस पानी का सेवन चाय की तरह कर लें। दिनभर में 1-2 बार ऐसा करने से गठिया के दर्द से राहत मिलेगी।
बथुआ के ताजा पत्तों का रस- बथुआ के ताजा पत्तों का रस हर दिन 15 ग्राम पिएं। इसमें स्वाद के लिए कुछ भी न मिलाएं। खाली पेट पीने से ज्यादा लाभ होता है। तीन महीने पीने से दर्द से हमेशा के लिए निजात मिल जाती है।
एलोविरा- एलोविरा के पत्ते को काटकर उसका जेल दर्द होने वाली जगह पर लगाएं। इससे काफी राहत मिलेगी।
सौंठ का सेवन- सौंठ यानि सूखी अदरक का सेवन करने से गठिया के रोग में आराम मिलता है, इसे आप किसी भी रूप में पकवाकर खा सकते हैं जैसे - हरीरा या लड्डू आदि।
आलू का रस- गठिया का दर्द होने पर हर दिन खाना खाने से पहले से दो आलूओं का रस निकाल लें और पिएं। हर दिन कम से कम शरीर में 100 मिली. रस पीने से आराम मिलेगा।
हरी पत्तेदार शब्जी का सेवन- गठिया रोगी को हमेशा हरे पत्तेदार सब्जी का सेवन करना चाहिए, इससे बॉडी में ऊर्जा मिलती है और दर्द भी नहीं होता।
अरंडी के तेल की मालिश- भंयकर दर्द होने पर अरंडी के तेल से मालिश कर लें, इससे दर्द में राहत मिलने के साथ - साथ सूजन में भी कमी आती है।
आयुर्वेदिक औषधि
1.महा योगराज गुग्गुल
2.महा नारायण तेल
3.महा रासना आदि काढ़ा
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